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Samuel Paul Dhinakaran

आप अकेले नहीं हैं!

Samuel Dhinakaran
23 May
अकेलेपन का अर्थ यह नहीं कि हम अकेले हैं। हमारे चारों ओर लोगों के होते हुए भी हम अंदर से अकेलेपन का अनुभव करते हैं। अकेलापन हमें प्रेम रहित और त्यागे हुए का अनुभव दिलाता है। इससे हमारे हृदय टूट जाते हैं। इस तरह से यह हमें लोगों और परिस्थितियों के साथ प्रतिक्रियों पर प्रभाव डालता है। इन परिस्थितियों के द्वारा हमें बांधने का अनुभव होता होगा जैसे कि हम बंदीगृह में हो। लोगों ने आपके लिए अपने प्रेम को त्याग दिया हो और आपके भरोसे को तोडा हो। चाहे कुछ भी आपको अकेलेपन का एहसास दिलाए, परन्तु परमेश्वर आपको कहता है, मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। (इब्रानियों 13:5) परमेश्वर क्रूस पर अकेलेपन से गुजरा। उसने हमारे पापों को अपने शरीर पर लिया इसलिए परमेश्वर ने यीशु के विरुद्ध अपना मुख फेर लिया। यीशु हमारी ओर रहा और हमारे खात्तिर यह कहकर पुकारा, एली,एली, लमा शबक्तनी? (जिसका अर्थ है, हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर,तू ने मुझे क्यों छोड दिया?) यीशु ने परमेश्वर और हमारे बीच के मध्यस्थ में खडे होकर अकेलेपन की जंजीरों को तोड डाली है। यीशु हमारे साथ निकट होने के कारण हम कभी भी अकेलेपन का अनुभव नहीं करते हैं। 

राजा दाऊद भी अकेलेपन से गुजरा। दाऊद पर अपनी ईर्ष्या के कारण राजा शाऊल ने उसे मारने के लिए उसका पीछा कर रहा था। दाऊद भी अपने बेटे अबशलोम के द्वारा अपने घर से भगाया गया। दाऊद बहुत ही अकेलेपन से गुजरा। यद्यपि उसे भगा दिया गया परन्तु प्रभु उसके निकट हमेशा होता था। तभी तो वह भजन संहिता 139:8-10 में लिखता है, ‘‘यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं, तो वहां भी तू है! यदि मैं भोर की किरणों पर चढकर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकडे रहेगा।’’ मदर टेरेसा ने लिखा है कि, टीबी या कोढ कोई बडा रोग नहीं है; यह अनावश्यक, प्रेमरहित और परवाह रहित है। हम अपने शरीर के रोग को दवाई से ठीक कर सकते हैं परन्तु अकेलेपन, दुख और निराशापन का केवल इलाज प्रेम है। इस संसार में कई लोग ऐसे हैं जो रोटी के टुकडे के लिए मर रहे हैं परन्तु अत्यधिक कई लोग ऐसे हैं जिन्हें थोडा सा प्रेम नहीं मिल पा रहा है। यह अकेलेपन की न केवल गरीबी है परन्तु आत्मिक कंगालपन भी है। जैसे कि प्रेम के लिए लोग भूखे हैं वैसे ही परमेश्वर के लिए लोग अधिक भूखे हैं। 
परमेश्वर को जानने और केवल उसके साथ संबंध रखने से ही हमारे हृदयों का खालीपन भर सकता है जो केवल परमेश्वर के द्वारा ही भर सकता है। कोई भी या किसी भी चीज से हम अकेलेपन को हटा नहीं सकते। परमेश्वर का प्रेम ही हमारे हृट्दयों और हमारी परिस्थितियों को बदल सकता है। हमारे आगे दो बाते हैं जिसमें एक को चुनना है। हम या तो परमेश्वर के पास या दुख के पास दौड सकते हैं। यदि हम परमेश्वर की ओर दौडने को चुनते हैं, बाइबल कहती है, ‘‘परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है; और बंधियों को छुडाकर सम्पन्न करता है; परन्तु हठीले को सूखी भूमि पर रहना पडता है।’’ (भजन संहिता 68:6)यदि हम परमेश्वर के विरोध में जाते हैं, तो हमें केवल सूखी भूमि पर ही रहना पडेगा जो हमारे जीवन के सभी समस्याओं के सहने के बोझ का अनुभव हमें खुद करना पडेगा। परन्तु जब हम परमेश्वर को थामे रहते हैं, तो वह हमें भक्तिमय परिवारों, मित्रों और वातावरण देगा जो परमेश्वर के लिए बडे बडे कामों को पूरा करेंगे। याद रखें, आप अकेले तब होंगे यदि आप अकेलेपन में रहने को चुनते हैं। 
Prayer:
स्वर्ग के हमारे पिता,

आप मुझे न छोडेंगे न त्यागेंगे , उसके लिए आपको धन्यवाद। मैं जहां कहीं पर जाऊं आप मेरे साथ होंगे। आप मुझे अपने परिवार में अच्छे मित्र, अच्छे सहकर्मी और अच्छी संगति देंगे और मेरे जीवन से अकेलेपन को हटा देंगे। हे प्रभु, मेरे हृदय को अपने प्रेम से भरें। मैं आपके साथ रहने के लिए चुनता हूं। आप मेरे उत्तम मित्र बन जाएं। आपकी उपस्थिति में, मुझे शांति दें और मुझे आनन्दित करें। मैं यीशु के नाम में, प्रार्थना करता हूं, आमीन!

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