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Samuel Paul Dhinakaran

आप परमेश्वर के मंदिर हैं!

Samuel Dhinakaran
08 Aug
प्राचीन दिनों में परमेश्वर का मंदिर एक पुखती इमारत थी और जो लोग यहां पर आते थे वे परमेश्वर की महिमा का अनुभव करते थे। वे शायद चिंताओं और डर से वहां जाते होंगे परन्तु परमेश्वर की उपस्थिति उनके मनों से सारे डर को हटा देता था। वे बदल जाते थे। जैसे कि हमें भी इसी अनुभव को पाने की जरूरत है क्योंकि हम परमेश्वर का मंदिर हैं। वह हमारे अंदर वास करता है परन्तु जब आप उसके अभिषेक को पाते हैं तो आप उसके पराक्रमी गवाह बनने का सामर्थ पाते हैं।

पुराने नियम में हम शिमशोन के बारे में पढते हैं। परमेश्वर की आत्मा उस पर उतरी और उसने बडे बडे कार्य किए और उसने आपने लोगों को उनके शत्रुओं से छुटकारा दिलाया। यह दाऊद पर भी उतरा था और उसने भी बडी बडी जय पाई। यह सुलैमान पर भी उतरा और वह आलौकिक बुद्धि से भर गया और उत्तम आर्थिकता के स्तर के साथ देश पर राज्य किया। यह पतरस और चेलों पर भी उतरा और उन्होंने सामर्थ से भरकर सेवकाई की और परमेश्वर के पराक्रमी सामर्थ पर क्रियाशील हुए। इसी को तो परमेश्वर हमें देना चाहता है जो उसके मंदिर हैं। वह हमें अपना सामर्थीशाली उपकरण बनाना चाहता है। मेरे मित्र, इसी तरह से परमेश्वर चाहता है कि हम अपना जीवन व्यतीत करें। आज से परमेश्वर आपके लिए करेगा। वह अपनी पवित्र आत्मा से आपको भरेगा और खुद आपके अंदर वास करेगा। 
प्राचीन दिनों में कुछ लोग ही पवित्र आत्मा के अभिषेक से भरपूर थे। कुछ ही लोग ही अभिषिक्त किए गए और सामर्थ पाया परन्तु हमारे दिनों में परमेश्वर की प्रतिज्ञा है कि वह अपनी आत्मा से हर एक भरेगा। अंतिम दिनों में, परमेश्वर कहता है, मैं अपनी आत्मा हर प्राणी पर उण्डेलूंगा। आपके बेटे बेटियां भविष्यद्वाणी करेंगे, आपके जवान दर्शन देख़ेंगे और आपके पुरनिए स्वप्न देखेंगे(प्रेरितों 2:17) इसलिए आप भी उसके अभिषेक को पा सकते हैं। आपको केवल इतना करना है, उसे मांगना है क्योंकि प्रभु कहता है, ‘‘अत: जब तुम बुरे होकर अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो स्वर्गीय पिता अपने मांगनेवालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा।’’ (लूका 11:23) जब पवित्र आत्मा आपके अंदर आता है, तब आप परमेश्वर की उपस्थिति और सामर्थ से भर जाएंगे परन्तु ‘‘जब पवित्र आत्मा आप पर आएगा तो आप सामर्थ पाएंगे; आप यरूशलेम में और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होंगे।’’ (प्रेरित 1:8) इसलिए अभिषेक और वरदान पाने के लिए प्रभु की बाट जोहते रहें। 
Prayer:
प्रेमी पिता,
 
आपकी पवित्र आत्मा के लिए धन्यवाद जो मेरे अंदर वास करती है। मुझ में वास करने को छूने के लिए आपको धन्यवाद। मुझे अपना पवित्र मंदिर बनाने के लिए धन्यवाद। मुझे भी अपने अभिषेक से भर दें। मैं भी आपके सामर्थ से भर जाऊं जिससे कि मैं भी आपके लिए एक पराक्रमी गवाही बनूं। मुझे भी अभिषिक्त करें। पवित्र आत्मा के वरदानों से मुझे आशीष दें। आपकी पवित्र उपस्थिति मुझ में एक पराक्रमी रूप में वास करे। यीशु के नाम में, मैं प्रार्थना करता हूं, आमीन!

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