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Dr. Paul Dhinakaran

आप तो परमेश्वर की सम्पत्ति हैं!

Dr. Paul Dhinakaran
12 Dec
मेरा हृदय मुझ में आनन्दित होता है जब मैं कहता हूं, पूरे संसार में सब से मुख्य समाचार यह है कि परमेश्वर के पुत्र ने मुझे दण्ड से छुडाने के लिए दाम चुकाया है। मसीह में जीवित रहना न तो नैतिकता के महत्त्वपूर्ण या परम्पारिक संस्कारों को मानना है इसके अलावा ये आत्मा, प्राण और शरीर में पूर्ण स्वतंत्र होना है।

एक दिन यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन सडक पर चल रहे थे। उन्होंने देखा कि एक छोटी लडकी दास के रूप में बेची जा रही थी और वह बहुत रो रही थी। लिंकन का हृदय पिघल गया। उन्होंने उसे खरीद लिया, उसे घर ले आए और उससे कहा, बेटी, तुम जा सकती हो। मैं तुम्हें आजाद करता हूम्। अपन अजीवन जीओ। वह लडकी चकित रह गई। वह उनके चरणों में गिर कर कहने लगी, सर, क्या आप सच में मुझे आजाद कर रहे हैं? यदि हां तो मुझे जीवन भर आप ही की सेवा करने दें। वह उनकी दोस्त बन गई और बडे प्रेम से उनकी सेवा करती रही।
 
प्रियों, इसी प्रकार आप भी शैतान की दासता में थे। यीशु मसीह इस संसार में आया कि आपको आजाद करे। उसने आपको कैसे आजाद किया? उसने आपको रुपयों या डॉलरों से आजाद नहीं किया। उसने अपना कीमती लहू बहाकर आपको खरीद लिया है। तभी तो वचन कहता है, ‘‘तुम दाम देकर मोल लिए गए हो, इसलिए अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।’’(1 कुरिन्थियों 6:20)
हां, जब परमेश्वर ने अपने लोगों के पापों, दोष और दण्ड से छुडाने के लिए अपने पुत्र का भारी दाम देकर मूल्य चुकाया, उनके शरीरों के साथ साथ उनकी आत्माओं के लिए यह सेंतमेंत था। उसने आपको हर बीमारी, शाप और पाप के सामर्थ से आजाद कर दिया है। तुम दाम देकर मोल लिए गए हो; मनुष्यों के दास न बनो। (1 कुरिन्थियों 7:23) जैसे कि आप को हमेशा के लिए खरीदा गया है इसलिए आपकी आत्मा, प्राण और शरीर उसकी सम्पत्ति कहलाती है। आपको उमण्डती हुई शांति और आनन्द मे जीने के लिए स्वतंत्र किया गया है। एक पवित्र जीवन जीएं ताकि उसके नाम को आदर मिले और उसमें आप आनन्दित रहें।
Prayer:

प्रिय प्रभु,

अपने अनमोल लहू के द्वारा मेरी आत्मा, प्राण और शरीर को छुडाने के लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं। आपके इस असीम प्रेम के लिए धन्यवाद। मेरी मदद करें कि मैं हर बात में आपको अनमोल और योग्य दिखाऊं। मुझे आपके वचन और उपस्थिति के लिए और भी उन्माद दें। मेरी मदद करें कि मैं अपनी भावनाओं, मनोभावनाओं और इच्छा शक्ति से आपको आदर दूं। यीशु के नाम में, मैं प्रार्थना करता हूं, आमीन।

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