Loading...
Paul Dhinakaran

एक दूसरे का सम्मान करें!

Dr. Paul Dhinakaran
23 Jan

भजन संहिता 149:4 कहता है, क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा से प्रसन्न रहता है; वह नम्र लोगों का उद्धार करके उन्हें शोभायमान करेगा। महिमा के पहले दीनता आती है। कुछ लोग परमेश्वर के सामने नम्र नमते हैं न कि मनुष्यों के सामने। परन्तु बाइबल हमें यह आदेश देती है कि ‘‘विरोध और झूठी बडाई के लिए कुछ न करो, पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।’’ (फिलिप्पियों 2:3) दीनता की गहरी नींव एक चिह्न है जो एक व्यक्ति के जीवन को यीशु मसीह पर बनाती है। ऐसी नींव एक व्यक्ति को उसके जीवन में परमेश्वर की उनके लिए योजना को पहुंचने से न हिलाएगी या मुड कर जाने की अनुमति नहीं देगी। जॉन न्यूटन कहते हैं, मसीह की पाठशाला और उज्जवल प्रमाणों में प्रेम और दीनता जो ऊंचे लक्ष्य हैं मैं उसके पीछे चलता हूं कि नि:संदेह वह हमारा स्वामी है। 

बहुत वर्ष पहले जर्मनी में, किसी प्राथमिक विद्यालय के एक अधेड एवं पढे लिखे प्राधानाध्यापक ने अपने विद्यालय के पांचनीं कक्षा के विद्यार्थियों का स्तानक- दिवस मनाया। हर बार जब कोई विद्यार्थी उन से प्रमाण-पत्र लेने आता, तो वह झुककर उसे दिया करते थे। यह देखकर दर्शकों ने हैरान होकर कहा, सर, आप इन छोटे-छोटे बच्चों के आगे क्यों झुक रहे हैं? उन्होंने उत्तर दियाये सब बच्चे मेरे द्वारा वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और राजनैतिक अगुवे बनने के लिए प्रशिक्षित किए गए हैं। आज तो ये छोटे बच्चे हैं पर मेरा विश्वास है कि भविष्य में ये समाज में ऊंचे पदों पर होंगे। इसलिए मैं उनके अंदर की महानता को पहचान कर उस महानता के आगे झुक रहा हूं। 

मेरे प्रिय मित्र, हमारा प्रभु भी आपके अंदर जो विद्यामान है और उस महानता को देखता है जैसे उन प्रधानाध्यापक  ने देखा। उनके समान आप को भी लोगाँ के अंदर की महानता को देखना चाहिए। सब लोगों के आगे नम्र रहें। वे भी परमेश्वर के द्वारा रचे गए हैं और उनमें भी वरदान और उद्देश्य है। आपके पद या स्तर के कारण आप दूसरों को नीचा न देखें। और जब आपके पास सब कुछ है तब आपको और अधिक नम्र होना चाहिए। आपके मन के इस दृष्टिकोण से आप ऊंचाई पर होंगे। आपके चारों ओर के हर एक लोगों में महानता को पहचानें।
Prayer:
प्रिय प्रभु,

आपके और मनुष्य के सामने मैं अकसर घमण्डी रहा, उसके लिए मुझे क्षमा करें। मुझे एक नम्र हृदय दें। मेरे मन और मेरे हृदय को आपकी महानता से भरें जिससे कि मेरे जीवन में ‘मैं’ मर जाए। मेरा हृदय आपके और लोगों की ओर कृतज्ञता से भरें जिससे कि मैं उनकी अच्छी संगति में रहूं और उन्हें दिखा सकूं कि वे मेरे लिए क्या हैं। मेरे स्वभाव को बदलने और मुझे एक दीन हृदय देने के लिए आपको धन्यवाद करता हूं। यीशु के नाम में, आमीन

For Prayer Help (24x7) - 044 45 999 000