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आज्ञा मानें और आशीष पाएं!

Shilpa Dhinakaran
22 Jul
हेलो मित्रों! आज की प्रतिज्ञा व्यवस्थाविवरण 28:6 से ली गई है। वचन कहता है, ‘‘धन्य हो तू भीतर आते समय, और धन्य हो तू बाहर जाते समय।’’आप जहां कहीं पर हैं और जहां कहीं भी जाएंगे, प्रभु कहता है कि तू धन्य है क्योंकि आप परमेश्वर की संतान हैं। प्रभु अपनी संतानों को आशीष देना पसंद करता है। प्रभु हमें आनन्दित और आशीषित देखना चाहता है। यह पुस्तक बाइबल उन दिनों लिखी गई थी जब लोग युद्ध के लिए जाया करते थे। इसलिए यह वचन उनके लिए बहुत ही आशीषित होता था जब वे घर से बाहर जाते थे और जब वे वापस आते थे, प्रभु उन्हें आशीष देता था।
 
जब आप व्यवस्थाविवरण 28 को पढेंगे, तो उसमें परमेश्वर की सभी आशीषें भरपूर हैं। इस अध्याय का दूसरा वचन इन आशीषों को विरासत में लेने के लिए कौन सी मुख्य बातें करनी चाहिए। यह कहता है, ‘‘फिर अपने परमेश्वर यहोवा की सुनने के कारण ये सब आशीर्वाद तुझ पर पूरे होंगे।’’ इससे हम केवल एक बात जानते हैं कि हमें प्रभु की आवाज के आज्ञाकारी बनना होगा। तब प्रभु आपको बहुतायत से आशीषित करेंगे।
जब बच्चे आज्ञाकारी होते हैं, उनके माता पिता बहुत ही खुश होते है, उन पर अपना प्रेम बरसाते हैं और उन्हें उपहार देते हैं। उसी प्रकार जब आप आज्ञा मानेंगे तो प्रभु आप से बहुत ही खुश होगा और आपको बहुतायत की आशीष देगा। आज प्रभु से कहें कि आप एक आज्ञाकारी बच्चे बनेंगे। प्रभु आप पर आनन्दित होगा और आपको बहुतायत की आशीष देगा।
Prayer:
मेरे स्वर्गीय प्रेमी पिता,

आज की प्रतिज्ञा वचन के लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं। हे प्रभु, मैं अपना जीवन पूरी तरह से आपके हाथों में समर्पित करती हूं। मुझ पर अनुग्रह और बल दें कि मैं हर बात में आपकी आज्ञाकारी बनूं। मैं आपके नाम की महिमा लाऊं। आज की प्रतिज्ञा वचन के अनुसार आप मुझे आशीष देने जा रहे हैं, इसलिए मैं आपका धन्यवाद करती हूं। यीशु के नाम में,

मैं प्रार्थना करती हूं, आमीन!

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