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DGS Dhinakaran

अपने शत्रुओं से प्रेम करो!

Bro. D.G.S Dhinakaran
20 May
हर विश्वासी धर्मी का पद पाता है क्योंकि उसके उद्धार से मसीह के द्वारा हम वहां पर रखे जाते हैं। हमारे विश्वास के द्वारा ही हम उसके साथ स्वीकार किए जाते हैं। परन्तु धार्मिकता का जीवन जीना और परमेश्वर के प्रेम को दूसरों तक प्रतिबिंब होना यह हमारे अपने बल से बहुत ही कठिन है। जरा सोचें, आपके मित्र ने आपकी गलतियों पर अंतिम बार उंगली उठाई थी? आपकी एक निर्बलता को कई बार दोहराना यह एक अच्छा मित्र नहीं करता। परन्तु शत्रुओं के साथ ऐसा नहीं होता। जैसे कि एक शत्रु आपके कार्यों पर हमेशा ध्यान रखता है और परमेश्वर के विरोध में पाप कराता है। तभी तो शत्रु परमेश्वर को चुनौती देता है कि वह आपको अपने जाल में फंसा देगा। परन्तु यह परमेश्वर का प्रेम है जो हमारी रक्षा और हमें सुरक्षित रखता है। 

कुछ वर्ष पहले, एक युवा प्रचारक जो हमेशा परमेश्वर के दूसरे सेवकों का अपमान करता था। वह बिना किसी भी कारण वश मुझे और मेरी सेवकाई पर आरोप लगाता था। कुछ ही समय के बाद मैं इसके बारे में भूल गया। एक रात को टेलीफोन की घंटी बजी और फोन के दूसरी ओर वह बातें कर रहा था। वह प्रचुरता से रो रहा था। उसने कहा, मेरी एकलौती बेटी को सिर में एक गांठ होने के कारण मृत्यु की शैय्या पर है। मैं उसे खोना नहीं चाहता। कृपया मेरी मदद करें। मैं विश्वास ही नहीं कर सका जो व्यक्ति मेरा अपमान करता था, वो इस तरह से बडी दयनीय दशा में रो रहा है। मैं नहीं जानता था कि क्या करूं। रोमियों 5:5 के अनुसार पवित्र आत्मा ने अपने प्रेम को मेरे अंदर उण्डेला। एक तरफ से तो मैं उसकी आवाज सुनकर क्रोधित हो रहा था तो दूसरी तरफ परमेश्वर का प्रेम मेरे अंदर उमण्डने लगा था। मैं ने अनजाने में कहा, ‘‘भाई, कल सुबह तुम्हारी बेटी चंगी हो जाएगी।’’ उसने कहा, ‘‘भाई, कल सुबह तो उसका ऑपरेशन है; वे उसकी खोपडी खोलेंगे।’’ परन्तु मैं ने उसे फिर से कहा, कल सुबह वह गांठ वहां पर रहेगी ही नहीं। उसने यह कहकर फोन रख दिया कि वह उससे बाद में बात करेगा। मेरे अंदर एक बडा भय छा गया यह सोचकर कि मैं ने उसे देह में आकर ऐसा कह दिया। मैं सारी रात परमेश्वर को पुकारता और रोता रहा और कहा, ‘‘हे पिता, मुझे क्षमा करें, मुझे इस व्यक्ति पर सचमुच क्रोध था, परन्तु उस छोटी लडकी की हालत को देखकर मैं उत्तेजित हो गया। कृपया मुझे क्षमा करें; उस पर दया दिखाएं।’’ प्रभु यीशु मसीह उसके लिए तरस से भर गए। अगली सुबह जब डॉक्टरों ने सर्जरी के पहले उसकी जांच की तो उन्होंने देखा कि उसके सिर में कोई गांठ है ही नहीं। प्रभु ने उसे बचाया और उसे जीवित रखा। 
प्रियजन, ईश्वरीय प्रेम इस मसीही यात्रा का एक सबसे बडा यंत्र है। यह अतुलनीय प्रेम मसीह के दिव्य जीवन से आता है और हर विश्वासी के जीवन के द्वारा प्रगट होता है। उसकी पवित्र आत्मा के द्वारा हम प्रेम करने में समर्थ होते हैं जैसे कि मसीह ने प्रेम किया। यह आशीष उन लोगों को ‘‘जो तुम्हें शाप दें, उनको आशीष दो; जो तुम्हारा अपमान करें, उनके लिए प्रार्थना करो।’’ (लूका 6:28) के अनुसार उसके प्रेम के द्वारा ही केवल सम्भव है।
Prayer:
स्वर्गीय पिता,

मेरा प्रेम कभी कठोर और कभी कोमल होता है। मैं प्रार्थना मांगता हूं कि मैं आपकी महिमा के लिए मसीह के लिए जीवित रहूं और दूसरों पर उसका यह अतुलनीय प्रेम को प्रगट करूं । मुझ पर भी मसीह की तरह प्रेम उण्डेंले और अनुग्रह करें जिसने अपने शत्रुओं से प्रेम किया,जब उसे क्रूस पर कीले ठोंका गया था। मुझे भी यह कहने में समर्थ करें कि ‘‘हे पिता, इन्हें क्षमा कर क्योंकि ये नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं।’’ यीशु के नाम में, मैं प्रार्थना करता हूं, आमीन!

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