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Stella dhinakaran

प्रेम जो प्राणों को बचाता है!

Sis. Stella Dhinakaran
19 May
मसीह यीशु से उन्माद और उत्कटता से प्रेम करना ही एक गहरे भक्ति का जीवन है। प्रेरित पौलुस ने अपनी सेवकाई के दौरान विभिन्न क्लेशों और अपमानों का सामना किया परन्तु उसे किसी से भी कोई बाधा नहीं हुई। हम प्रेरित 17:16 में पढते हैं, जब पौलुस एथेंस में उनकी बाट जोह रहा था तो नगर को परमेश्वर के विरूद्ध कामों से भरा हुआ देखकर उसका जी जल गया। क्या हमें भी प्रभु को न जाननेवालों के लिए ऐसी उत्तेजक आत्मा है ? प्रभु खुद उन लोगों के बारे में चिंता करता है जो अनजान हैं। जब उसने भीड को देखा, तो उसे उन पर तरस आया क्योंकि वे उन भेडों के समान थीं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए थे। (मत्ती 9:36) यीशु हमेशा अपनी संतानों को भेड के समान समझता था। भेडें वास्तव में मंदबुद्धि होती हैं। वे यह नहीं जानती कि वे क्या कर रही हैं। वे शत्रुओं के आक्रमणों की संवेदनशील होती हैं। तभी तो चरवाहा भेडों के आगे आगे जाता है कि वे उसकी पीछा आसानी से कर सकें। हम में से कई भेड जैसे हैं। हम भी मनगंढत कहानियों के द्वारा आसानी से गिर जाते हैं और इसलिए हमें फाड खाने में शत्रु को आसानी हो जाती है और तभी तो शैतान गर्जनेवाले  सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किसको फाड खाए। (1 पतरस 5:8) परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो क्योंकि उसने क्रूस पर अपना लहू बहाया कि शैतान के आक्रमणों से वह अपनी भेडों की ढाल बनें।

भाई दिनाकरन ने कभी भी लोगों को सुधारने की कोशिश नहीं की जो प्रभु के बारे में पूरी तरह से अज्ञान थे और प्रभु यीशु मसीह के बारे में कठोर और दर्दनाक बातों का उपयोग करते थे। उसके बजाए वे उन से पूरी दीनता से बातें करते थे। मसीह के प्रेम से भरपूर होकर वे प्रभु के द्वारा अपने असिद्ध जीवन को आशीषित जीवन को बदलने के बारे में कहा करते थे। वे उन्हें निश्चित करते थे कि प्रभु उन्हें भी वही प्रेम दिखाएगा। वे उन्हें इन सत्यों को साधारण तरीकों से बडे उन्माद से समझाते थे। उच्च पदवाले और प्रतिष्ठित लोग और उच्च अधिकारी जो मसीह को नहीं जानते थे वे उन्हें बहुत ही ध्यान से सुनते थे। वे सत्य के बारे में जानकारी पाते थे।
इसलिए मेरे अतिप्रियो, सब से पहले, इस तरह से जीवन बिताने के लिए हमारा जीवन प्रभु के प्रेम के साथ उमण्डना चाहिए जिससे कि एक दिव्य जीवन प्राप्त कर सकें और उसके ज्ञान के बारे में जानने की जरूरत है और उसके बाद खुद को जांचना चाहिए कि हमें मसीह यीशु के बारे में किस प्रकार का ज्ञान है और उसके लिए हमारे अंदर कितना प्रेम और उन्माद है। क्या हम उसके लिए बडे उन्माद के साथ गहरी भक्ति और उन्नति में बढ रहे हैं और इस दिव्य जीवन की महानता को जानकर दूसरों की मदद भी करनी चाहिए? पुराने नियम में परमेश्वर ने कहा, फिर यह बडा नगर नीनवे, जिसमें एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहिचानते, और बहुत से घरेलु पशु भी उसमें रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?(योना 4:11) संसार ऐसे अज्ञान लोगों से भरा पडा है जो सत्य को जाने बिना अपनी संस्कृति के पीछे चलते हैं। परमेश्वर को उन सभों की परवाह और तरस खाता है। यह आपका और मेरा कर्तव्य है कि हमारे जीवनों के द्वारा मसीह को उन तक पहुंचाएं। आइए हम खुद को इस संसार का नमक और ज्योति बनने के लिए मसीह के उद्देश्य के लिए समर्पण करें जिससे कि कई लोग उसके पास आ सकें।
Prayer:
प्रेमी स्वर्गीय पिता,

मेरे जीवन में आपकी ओर से सच्चे प्रेम और बडे उन्माद को पहचानने के लिए मुझे हर प्रकार का ज्ञान दें। मुझे अपनी गुप्त बातें सिखाएं और मुझ पर अनुग्रह करें कि मैं लोगों को अपने दिव्य उत्कटता से आपके प्रेम को समझा सकूं। मुझे भी अब्राहम की तरह शहर के दस धर्मी लोगों के लिए विनती कराएं जिससे कि वे नष्ट होने से बच जाएं। उन लोगों की खात्तिर मुझे मध्यस्थ में खडे रहने के लिए अपने प्रेम में विवश करें। हमारे प्रभु यीशु के मधुर नाम में, मैं दीनता से प्रार्थना करती हूं, हे पिता, आमीन!

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