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प्रभु की सुनें!

Shilpa Dhinakaran
30 Sep
प्रिय मित्र, परमेश्वर के चरणों में बैठना, उसके वचन पढना और वह हम से बात करे उसके लिए उसकी बाट जोहना एक महत्त्वपूर्ण बात है। हर सुबह जब हम उसकी बाट जोहते हैं तब वह अपनी आशीष को हम पर उण्डेलता है। नीतिवचन 8:34 के परमेश्वर के वचन के अनुसार, ‘‘धन्य हैं वे जो प्रतिदिन उसके वचन को सुनते हैं। हर एक को जो उसके निकट आता है और उसकी सुनता है, प्रभु निश्चय उसे आशीष देता है।’’ इसलिए हमें सुबह सवेरे उठने और उसे सुनने का एक अभ्यास करना चाहिए। 

मैं एक लडकी को जानती हूं जो अपने बचपन से दर्शनों को देखा करती थी। उसने एक दर्शन में देखा कि कैसे बाइबल खुद यीशु मसीह के रूप में बदल गया। तभी मैं ने जाना कि परमेश्वर का वचन कितना महत्त्वपूर्ण है। हम भजन संहिता 119:105 में परमेश्वर के वचन को पढते हैं, ‘‘तेरा वचन मेरे पांव के लिए दीपक, और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है।’’ जैसे ही हम पवित्रशास्त्र के वचन पर मनन करते जब हम परमेश्वर को हम से बात करने के लिए कहते हैं तो प्रभु हमें मार्ग दिखाता है और जिस मार्ग में हम चलना चाहते हैं हमारी ज्योति बनकर, वह उसमें चलने का मार्गदर्शन करता है। आप जैसे ही उसे बात करने को कहेंगे वह आपके मार्ग के हर कदम में आपको चलाएगा और आपकी अगुवाई करेगा। आप यह सोचकर बहुत ही परेशान होंगे कि मैं क्या करूं और किस मार्ग में जाऊं परन्तु जब आप परमेश्वर की ओर मुडेंगे, जिस मार्ग में आपको चलना है वह मार्ग दिखाएगा।
बाइबल में, कैसे परमेश्वर मरियम के बारे में कहता है जब वह उसको सुनने के लिए उसके कदमों पर बैठी थी। मार्था और मरियम दोनों बहनें थीं। एक दिन जब यीशु उनके घर गया, मरियम उसकी बातों को सुनने के लिए दौडकर उसके चरणों में बैठ गई। मार्था अपने घर के कामकाज से बहुत व्यस्त थी। हम समझते हैं कि मार्था ने ठीक किया परन्तु यीशु ने स्पष्टता से कहा, ‘‘मार्था, हे मार्था, तू बहुत बातों के लिए चिंता करती और घबराती है। परन्तु एक बात आवश्यक है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है जो उससे छीना न जाएगा।’’ यीशु के कहने का यह मतलब था कि यदि तुम मेरे चरणों में बैठोगी तो तुम्हारी सारी चिंता हट जाएंगी। यीशु चाहता है हम किसी की भी चिंता किए बिना उसके साथ हमारी संगति के बारे में चिंता करें और जो कुछ उसे अच्छा लगता है उसे प्रभु के लिए करें क्योंकि वही समय पर काम आएगा। इसलिए क्या आप परमेश्वर के वचन को पढने की प्यास के लिए तैयार हैं? तो निश्चय आपको आशीष मिलेगी। 
Prayer:
प्रेमी यीशु,

इस प्रतिज्ञा वचन के लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं, पिता। प्रतिदिन मेरी मदद करें कि मैं आपके चरणों में बैठूं और आपके वचन को सुनूं। मेरी सारी चिंताएं हटा दें। आपका वचन मेरे हृदय को बलवंत करे और जिस मार्ग में जाना है उसमें आप मुझे ले जाएं। आपकी इच्छा के अनुसार मेरी अगुवाई करें। मुझे सही दिशा दिखाएं। यीशु के मधुर नाम में, मैं प्रार्थना करती हूं, आमीन!

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