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Paul Dhinakaran

कृपादृष्टि रखूंगा!

Dr. Paul Dhinakaran
14 Jan
आज की परेशान परिस्थितियों के बीच हमारे लिए परमेश्वर की एक सुंदर प्रतिज्ञा है जो भजन संहिता 32:8 से ली गई है, ‘‘मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मति दिया करूंगा।’’ (भजन संहिता 32:8) आप निश्चिंत रहें कि परमेश्वर की दृष्टि आप पर है। आपकी जरूरत और आंसू उससे अज्ञात नहीं है और अब से आप परमेश्वर के मार्गों को स्पष्टता से देखेंगे।

एक बार मैं जेनरल पेटोन की जीवनी के बारे में पढ रहा था। वे सेना में एक प्रतिष्ठित जेनरल थे, जिन्होंने जर्मन के विरुद्ध जंग लडी थी और जय पर जय पाते रहे। जब कभी भी युद्ध के जहाज बमों को नीचे गिरा रहे थे, वे निडरता से उनके बीच चलते थे। जेनरल पेटन के साहस के कारण उनके बहुत ही कठिन स्थान कब्जे में किए गए थे। अखबार के रिपोर्टरउन उन से मिले और पूछा, ‘‘श्रीमान, शत्रुओं के द्वारा भारी बमबारी स्थानों को आप ने कैसे कब्जे में कर लिया? हम ने सुना है कि आप एक विशेष पुस्तक प्रतिदिन पढते हैं। क्या हम उस पुस्तक के बारे में जान सकते हैं? उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट से कहा, ‘‘यह तो पवित्र बाइबल है। चाहे घमाशान युद्ध हो रह अहो मैं इसे प्रतिदिन पढता हूं। प्रभु युद्ध में कैसे आगे चलना है मेरी अगुवाई करके सिखाता है। जब मैं इस पुस्तक को पढता हूं मेरी आत्मा नई होती जाती है। इस संसार में मुझे जीने के लिए नियुक्त समय रखा गया है। तब तक कोई मनुष्य या कोई शैतान मुझे नष्ट नहीं कर सकता या मेरे जीवन को नही ले सकता।
प्रियजन,पूरी बाइबल और कुछ नहीं केवल एक यात्री का नक्शा है। यदि आप अपने हृदय को किसी भी कार्य के लिए दिशाओं से भरने की अनुमति नहीं देंगे तो आप अपने लक्ष्य को कभी नहीं चूकेंगे। अब भी परमेश्वर आपके काम, परिवार और स्कूल में परीक्षाओं और अनिश्चयता को देखता है। वह आपको अपनी बुद्धि से अगुवाई करेगा। वह आपको संयम देगा जिससे कि आप सही निर्णयों को लेने में मदद कर सकें। याद रखें कि उसकी आंखें आप पर बनी हैं।जब तक आप उसके दिव्य मार्गदर्शन को पाने के लिए अपने हृदय को खोलते हैं तब तक आपको कोई भी अलग नहीं कर सकता। आप को हर नए दिन में वचन बलवंत करें,आकाश के पक्षियों को देखो, वे न तो बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं, फिर भी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन्हें खिलाता है। क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते? (मत्ती 6:26)
Prayer:
प्रिय प्रभु, जो फूलों को वस्त्र और पक्षियों को भोजन देता है, मैं आपकी भलाई पर भरोसा रखता हूं। आपकी आंखें लगातार मेरी ओर लगी हुई हैं कि मेरी अगुवाई करे, इसलिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं। मैं आपके सामने अपनी परिस्थितियों और जरूरतों को लाता हूं। मैं आपके अनुग्रह के बिना इस मार्ग से गुजरने में असमर्थ हूं। मैं नहीं जानता कि मैं किस मार्ग में चलूं। कृपया, हे प्रभु मेरे आगे चलें। आपके मार्ग मुझे प्रगट करें कि मैं उस मार्ग को समझ सकूम्7 मुझे और मेरे परिवार को आशीष दें। यीशु के नाम में, मैं प्रार्थना करता हूं आमीन!

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