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Dr. Paul Dhinakaran

परमेश्वर का आत्मा आपके अंदर है!

Dr. Paul Dhinakaran
22 Nov
मेरे अनमोल मित्र, आज के लिए परमेश्वर की प्रतिज्ञा प्रेरितों 1:8 से ली गई है, ‘‘परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और  यरूशलेम और सारे यहूदिया और सारे सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।’’ परमेश्वर नहीं चाहता कि हम सामर्थ रहित न हो। वह चाहता है कि हम उसकी सामर्थ में भरपूर रहें। तभी तो वह अपनी पवित्र आत्मा से हमें भरता है। यीशु के अंदर जो आत्मा था, वह आपके साथ भी रह सकता है। यही महान वरदान आप परमेश्वर से पा सकते हैं। क्रूस पर यीशु जब मरा उसने अपनी आत्मा सौंप दी। कोई शैतान उसकी आत्मा पर जयवंत नहीं हो सकता है परन्तु उसने अपनी आत्मा को सर्वशक्तिमान परमेश्वर को समर्पित किया। उसने ऐसा क्यों किया? उसने ऐसा किया जिससे कि परमेश्वर उस आत्मा को आपके दे। 

यीशु ने क्रूस पर अपने दुखों के द्वारा पवित्र आत्मा का सामर्थ उत्पन्न किया। जब यीशु इस पृथ्वी पर था, पवित्र आत्मा नहीं दिया गया क्योंकि वो उसके अंदर था। यूहन्ना 7:39 में हम पढते हैं, उसने यह पवित्र आत्मा के विषय में कहा, ‘‘जिसे उस पर विश्वास करनेवाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था, क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।’’ यीशु को क्रूस पर दुख उठाना था और अपने लहू के द्वारा दाम को चुकाना था जिससे कि पवित्र आत्मा उसके द्वारा उत्पन्न हो कि आप और मैं उसे और उसके सामर्थ को पा सकें। प्रेरितों 10:38 में हम पढते हैं कि पवित्र आत्मा के द्वारा यीशु सामर्थ से भर गया; ‘‘परमेश्वर ने किस रीति से यीशु नासरी को पवित्र आत्मा और सामर्थ से अभिषेक किया; वह भलाई करता और सब को को शैतान के सताए हुए थे, अच्छा करता फिरा, क्योंकि परमेश्वर उसके साथ था।’’ वही सामर्थ आपको दिया जाएगा कि परमेश्वर आपके साथ रहे। 
आज वही प्रभु पवित्र आत्मा आपके पास हो सकता है जो यीशु में था। प्रभु कहता है, मांगो, तो दिया जाएगा। जब वह आपके अंदर आता है, वह आपको नई भाषा देता है। वह अन्य भाषा के द्वारा और विदेशी होठों के द्वारा बातें करता है, यशायाह 28:11,‘‘वह तो इन लोगों से परदेशी होठों और विदेशी भाषावालों के द्वारा बातें करेगा।’’ जब पवित्र आत्मा आपके अंदर आता है, वह आपको विश्राम देता है। सारा दर्द, डर और चिंता चली जाती है। तब सामर्थ आता है। जब आपको कोई डर नहीं होगा तो आपको सारा सामर्थ होगा है न?तभी तो पवित्र आत्मा रोमियों 8:26 के अनुसार कार्य करता है, ‘‘इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है: क्योंकि हम नहीं जानते कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए, परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर, जो बयान से बाहर है, हमारे लिए विनती करता है।’’ पवित्र आत्मा हमारे द्वारा नई भाषाओं में प्रार्थना करता है और हमारे सारे डर को हटाता है और परमेश्वर की इच्छा में हमारी अगुवाई करता है जैसे कि रोमियों 8:27 में लिखा है। परमेश्वर जैसे कि अन्य भाषा में जो आप बात से करता है, आपको सिखाएगा और आपकी आत्मा में बडा बल और विश्राम देगा। तब आप उसके उद्धार और महिमा के सामर्थ के द्वारा सभी परीक्षाओं पर जयवंत करने में समर्थ होगा जैसे कि यीशु ने जंगल में अपनी परीक्षा पर जय पाई।
Prayer:
प्रेमी प्रभु यीशु,

मुझे अपनी आत्मा से भरें जो आपने क्रूस पर मेरे लिए उत्पन्न की थी। मैं आपको अपने अंदर पाता हूं। मेरे साथ बनें रहें। मुझे परीक्षाओं पर जयवंत होने में विश्राम और सामर्थ दें जिससे कि मैं एक सामर्थीशाली जीवन व्यतीत करूं कि आपके नाम की गवाही बनूं। आपके मधुर नाम में, मैं प्रार्थना करता हूं, आमीन!
 

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