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Dr. Paul Dhinakaran

परमेश्वर आप पर दृष्टि रखता है!

Dr. Paul Dhinakaran
12 Jul
बाइबिल हमें बताती है कि परमेश्वर हृदयों को जांचता एवं मनों को खोजता है। (यिर्मयाह 17:10) इसके दो कारण है; पहली बात है , इस कारण को देखना है कि आपका हृदय उनके सामने सही है कि नहीं। क्या आप उसकी विधियों को मानने में ईमानदार है और दूसरी बात है क्या वह मजबूत है या कमजोर है। अगर कमजोर है तो परमेश्वर सामर्थी और मजबूत बनायेगा। 

पहला अंतरिक्ष यात्री, नील आर्मस्ट्रांग जब चन्द्रमा पर पहुँचा तब वह नियुक्त समय से पहले ही उसकी तरह पर कदम रखना चाहता था। परन्तु नासा के अधिकारियों ने उसे ऐसा करने की अनुमति नहीं दी। वे इस बात को जानना चाहते हैं कि उसका हृदय चन्द्रमा के दबाद को सहने के लिए मजबूत है कि नहीं। उस जाँच को पूरा करने के बाद उन्हें चन्द्रमा पर कदम रखने की अनुममि दी गई। अब आप कल्पना कर सकते हैं, यदि एक असाधारण मनुष्य किसी दूसरे मनुष्य के हृदय को जाँचता है, जो कि मीलों दूर है फिर हमारा प्रभु हमारे लिये इससे कितना अधिक करेगा। 
जीवन का वचनः कोई भी परमेश्वर के भव्यता को देखकर चकित हो सकता है। हर एक मिनट वह हजारों लाखों लोगों के हृदय के मनों को जाँचता है। वह जाँचता है कि उनका हृदय परमेश्वर के सम्मुख सही है भी नहीं, दर्द सहने के लिए योग्य है कि नहीं, इस संसार के दबावों एवं दुखों को सहने योग्य है कि नहीं। इसका कारण हमें इस पद को स्मरण करना है,‘‘मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए है, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है ।’’ हाँ जब तक परमेश्वर आपके हृदय की चट्टान है, आपके पास वह साहस होगा कि आप हर एक दुःखद परिस्थिति का सामना कर सकें। किसी भी बात से आपका विश्वास नहीं डगमगाएगा, क्योंकि आपने परमेश्वर को अपना शरणस्थान और गढ़ बनाया है। 
Prayer:
प्रेमी स्वर्गीय पिता, मैं आपके सम्मुख आता हूँ एवं अपने जीवन के लिए आपके अनुग‘ह एवं सामर्थ को ढूँढता हूँ। जिस बात से भी होकर मैं गुजरूँ, मेरी मदद कर एवं सारी बातों में मुझे विजयी बना। यीशु के नाम से मैं इस प्रार्थना को मांगता/मांगती हूँ। आमीन्!

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