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Dr. Paul Dhinakaran

दिया करो तो पाओगे!

Dr. Paul Dhinakaran
05 Jul
वर्तमान के दिनों में, बाजारों में सभी उत्पादन को बेचने के लिए एक नई युद्ध नीति उपयोग करते हैं। ‘‘एक खरीदो, एक मुफ्त पाओ’’ हर एक को इन विज्ञापनों को देखकर बहुत खुश हो जाते हैं क्योंकि उन्हें कुछ सेंतमेंत मिलेगा। परन्तु उन विज्ञापनों के नीचे लिखा होता है तो वहां पर आप शर्तों और उपबंधों को देखते हैं। हां, मेरे मित्र, इस संसार में कुछ भी मुफ्त नहीं है परन्तु प्रभु ने हमें कई आशीषों को सेंतमेंत दिया है और चाहता है कि हम दूसरों को देने की अपेक्षा करता है। परमेश्वर की हर संतान देनेवाला होता है। ‘‘जो दूसरों की सींचता है उसकी भी सींची जाएगी।’’ (नीतिवचन 11:25) देना केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं है बल्कि देना किसी भी प्रकार का हो सकता है। आप अपने प्रियजन को समय देने या जो निराश हैं उन्हें उत्साहना के वचन कहना है। आपका देना उत्तम प्रतिफल लाता है। कभी कभी हम दूसरों के दोषों को गिनती करते हैं और उनके अनुसार हम उन्हें बदला देते हैं परन्तु सच्चा प्रेम हमें बिना गणना के भलाई करने में हमारी मदद करता है। हमें ऐसे भले चरित्र में बंधे रहना चाहिए। परमेश्वर हमें देने और पाने के नियमों को सिखाता है। वह कहता है, ‘‘दिया करो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा। लोग पूरा नाप दबा दबाकर और हिला हिलाकर और उभारता हुआ तुम्हारी गोद में डालेंगे, क्योंकि जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिए भी नापा जाएगा।’’ (लूका 6:38) जो कुछ भी आप दूसरों को देंगे वो आपको वापस आएगा।

एक गरीब महिला की बेटी बहुत बीमार थी। इसलिए उसने अपनी बेटी को अंगूर देना चाहती थी क्योंक़ि उसका यह सब से मन पसंद फल था। जब उसने अंगूरों को खोजा, उसने राजा के घर के बगीचे में पाए। उसने उस बगीचे के माली से उसके पास जो थोडे पैसे थे उन से कुछ अंगूरों को मांगा । माली ने कहा कि वह राजा की बेटी से बात करे। जब उसने उससे बातें की, तो उसने उसे अंगूरों की टोकरी उसे दी। इसलिए उस गरीब महिला ने कुछ पैसे जो उसके पास थे, उसे दिए। परन्तु राजा की बेटी ने उसे लेने से इन्कार कर दिया और कहा कि उसका पिता एक व्यापारी नहीं परन्तु राजा है और उसे अपने पास ही रखने को कहा। 
हां, हमारा पिता भी एक राजा है। इसलिए उसे भी बदले में कुछ भी नहीं चाहिए। उसकी केवल एक ही शर्त है जो वह हमारे सामने रखता है कि हम राजा के बच्चों के समान चलें और हम भी सेंतमेंत लें और दूसरों को सेंतमेंत दें। (मत्ती 10:8) यीशु बीमार को चंगा, मरे हुए जो जीवित, कोढी को शुद्ध करने और दुष्टात्माओं को भगाने के बाद कहता है। हमें दूसरों को हमारे पैसे, हमारा प्रेम और हमारा समय सेंतमेंत देना है। परमेश्वर किसी से भी कुछ नहीं लेता है। जब कोई प्रभु को उसके कार्य के लिए देता है, तो परमेश्वर उन्हें देता रहता है जब तक कि उसे आशीषों की भरपूरी नहीं हो जाती। वह यह भी कहता है, ‘‘सारे दशमांश भण्डार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजन वस्तु रहे; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है कि ऐसा करके मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिए खोलकर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूं कि नहीं।’’ (मलाकी 3:10) हम परमेश्वर को एक ही बात से परीक्षा कर सकते हैं, वो है देना। क्या परमेश्वर अपनी परीक्षा में असफल होगा? कभी नहीं। इसलिए आप उदारता से दें और प्रभु से महान आशीषें पाएं।
Prayer:
प्रेमी प्रभु,

अपने वचन के द्वारा आज मुझ से बात करने के लिए आपको धन्यवाद। अपनी पवित्र आत्मा से मुझे भरें और मेरी मदद करें कि मैं सुसमाचार को फैलाऊं जो मैं ने सेंतमेंत लिया था। हे प्रभु, मुझे आपके वचन को उठाने के लिए एक उपकरण बनाए। आपके आगमन के लिए मैं भी तैयार रहूं और दूसरों को भी तैयार करूं। मेरी मदद करें कि मैं उदारता से दूं और आपके हाथों से महान चीजों को पाऊं। ये मैं यीशु के नाम में, मांगता हूं, आमीन!

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