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Paul Dhinakaran

भरपूर आशीष!

Dr. Paul Dhinakaran
02 Jul

मेरे दोस्त, परमेश्वर आपको अपने भरपूर आशीर्वाद से भरना चाहते हैं। आज की प्रतिज्ञा यिर्मयाह 31:14 से है। यह कहता है, ‘‘मैं याजकों को चिकनी वस्तुओं से अति तृप्त करूंगा, और मेरी प्रजा मेरे उत्तम दानों से सन्तुष्ट होगी, यहोवा की यही वाणी है।’’ हाँ, परमेश्वर चाहता है कि आप पर भरपूर आशीषें हों और वह चाहता है कि आप संतुष्ट हों। शायद, आप कड़ी मेहनत कर रहे हैं या अपनी पढाई में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हो सकता है कि आप लोगों को पूरे दिल से बिना शर्त प्यार कर रहे हों या आप गरीबों को बलिदान दे रहे हों और परमेश्वर के काम का समर्थन कर रहे हों। लेकिन आपके जीवन में आप एक खालीपन का अहसास कर रहे हैं क्योंकि आप आशीर्वाद से संतुष्ट नहीं हैं। आज परमेश्वर आप से कहता है, कि हे मेरी प्रजा, मेरे याजक उस बहुतायत से तृप्त होंगे जो मैं उन्हें दूंगा। इसलिए आपका हृदय व्याकुल न हो।


हमें इस बहुतायत से भरने के लिए, यूहन्ना 1:16 के अनुसार, प्रभु यीशु सिद्ध हुए। वह परमेश्वर से भरा हुआ था और उसने अपने जीवन में परमेश्वर की इच्छा को पूरी तरह से पूरा किया। यहां तक कि उसने मानवता के उद्धार के लिए खुद को सूली पर चढ़ा दिया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में उसकी परिपूर्णता के कारण, हम अनुग्रह पर अनुग्रह प्राप्त करते हैं। और एक अनुवाद यह कहता है कि हम आशीर्वाद के बाद आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यिर्मयाह 32:40 में, हम पढ़ते हैं कि परमेश्वर ने आपके साथ, उसके लोगों, उसके याजकों के साथ एक वाचा बाँधी है, और वह कहता है, ‘‘मैं उनका भला करना न छोडूंगा।’’ हाँ मेरे दोस्त! प्रभु के हृदय की परिपूर्णता से आपके जीवन में एक के बाद एक आशीषें आती रहेंगी। यीशु को देखते रहें।

 

यीशु के पास केवल पाँच रोटियाँ और 2 मछलियाँ थीं, लेकिन उन्हें वहाँ की स्त्रियों और बच्चों के अलावा पाँच हज़ार पुरुष को खाना खिलाना था। उसे लोगों पर बहुत दया आई क्योंकि वे भूखे थे। इसलिए उस ने रोटी ली, धन्यवाद दिया, और आशीष दी। उसने रोटी तोड़ी और लोगों को दी। फिर से, चमत्कारिक रूप से नई रोटी बनी और फिर उसने उन्हें तोडा और लोगों को दिया। उसके प्रेम ने एक के बाद एक आशीर्वाद दिया और वहां इकट्ठे हुए सभी लोग संतुष्ट हुए। आज, प्रभु कहते हैं, मैं यह तुम्हारे लिए करूँगा। मलाकी 3:10 में, वह कहता है कि ‘‘सारे दशमांश भण्डार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है, कि ऐसा कर के मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिये खोल कर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूं कि नहीं।’’ और भजन संहिता 81:10 कहता है कि ‘‘तेरा परमेश्वर यहोवा मैं हूं, जो तुझे मिस्त्र देश से निकाल लाया है। तू अपना मुंह पसार, मैं उसे भर दूंगा।’’

Prayer:
 आपके अटूट प्रेम के लिए प्रभु आपका धन्यवाद। क्रूस पर आपके बलिदान के कारण मैं आपको धन्यवाद देता हूं, मुझे अपने जीवन में अनुग्रह पर अनुग्रह और आशीर्वाद पर आशीर्वाद मिला है। हे प्रभु, मुझे अपनी प्रजा, अपना याजक कहने के लिए धन्यवाद। मैं प्रार्थना करता हूं कि मेरा जीवन आपके भरपूर आशीर्वाद से संतुष्ट हो क्योंकि आप वृद्धि के परमेश्वर हैं। यीशु के नाम में, मैं प्रार्थना करता हूँ, आमीन।

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