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Dr. Paul Dhinakaran

येशु - जीवन जल की नदी

Dr. Paul Dhinakaran
09 Jan
हर प्राणी में जीवन होता है परन्तु सृष्टिकर्त्ता ही केवल उसका स्त्रोत है। हमारा जीवन मरा हुआ है यदि हमारा जीवन परमेश्वर में मसीह के साथ छिपा हुआ नहीं है क्योंकि परमेश्वर की ज्योति से हम रोशनी देखते हैं। अंधकार में जीवन,दुख,पीडा,दुष्टात्माओं का प्रहार होता है। परन्तु केवल प्रभु ही हमें प्राकृतिक बौद्धिक और आत्मिक जीवन देता है। केवल वही हमारे जीवन को प्रकाशित और आशीषित कर सकता है परमेश्वर के प्रकाश से हम अपने जीवनों के लिए परमेश्वर की योजना को समझ सकते हैं। जिसको हम समझ नहीं सकते और उसके विरूद्ध हम बडबडाते रहते हैं। जिस तरह हमें सूरज को देखने के लिए मोमबत्ती की जरूरत नहीं होती हम अपनी आंखों की ज्योति से देखते हैं उसी तरह से हम यीशु को अपनी खुद की रोशनी से नहीं देख सकते परन्तु यीशु की रोशनी में खुद को देख सकते हैं। 

एक बार यीशु एक कुएं के पास एक सामरी स्त्री से मिला और उससे बातचीत करने लगा। उसने उससे पूछा, “क्या तुम मुझ से जीवन का जल मांगती हो? इसलिए जाओ अपने पति को लाओ”। स्त्री ने जवाब दिया “मेरा कोई पति नहीं है”। यीशु ने उसके हृदय को जाचा। वह उसके जीवन को जानता था। हां परमेश्वर हमारे जीवन को जानता है। हम कुछ भी उससे छिपा नहीं सकते। यीशु ने उससे कहा, “तुम ने ठीक कहा,मेरा कोई पति नहीं क्योंकि तुम्हारे पांच पति थे,और अब जिसके साथ तुम रहती हो,वो भी तुम्हारा पति नहीं है। तुम ने सच कहा है”। ओह, मेरे प्रियजनों वह स्त्री एक आनंदित और शांति पूर्वक वैवाहिक जीवन चाहती थी परन्तु हाय। जिन पांच पतियों के साथ उसने विवाह किया उन्होंने उसके मन के अनुसार उसे आनंदित नहीं किया। इसलिए उसे जीवन के जल की प्यास थी। और जब यीशु ने उसे जीवन जल दिया तो उसका जीवन बदल गया। क्या आप भी इसी नाव में तैर रहे हैं? और यह कहकर विलाप कर रहे हैं कि मेरे परिवार में कोई शांति नहीं है। मेरा परिवाहिक जीवन विभाजित होकर गिर रहा है। 
जीवन का वचन 

यीशु ने कहा,‘‘जगत की ज्योति मैं हूं,जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अंधकार में न चलेगा बल्कि जीवन की ज्योति पाएगा।’’(यूहन्ना 8:12)आज यीशु की ओर देखें जो जीवन जल है। आपको उससे कोई भी बात छिपाने की आवश्यकता नहीं है,वह आपके हर विचार को जानता है। आप केवल उसे यह कहे कि हे यीशु,जैसे तुमने सामरी स्त्री को जीवन जल दिया उसी तरह मेरे जीवन को भी बदलें। आप फिर प्यासे न होंगे केवल इसी कारण से यीशु इस संसार में आया। 
 
Prayer:
प्रेमी प्रभु,मैं अपने को आपके सिंहासन के सामने पूरी तरह से समर्पित करता/करती हूं। जैसे कि सामरी स्त्री जीवन जल के द्वारा परिवर्तित की गई,उसी तरह मैं भी आपसे निवेदन करता/करती हूं क्योंकि मुझे कोई आराम नहीं मेरे परिवार में कोई शांति नहीं। अपने प्रेम से कृपया इसे बनाएं। मेरी मदद करें कि मैं आपकी ज्योति में चलूं।

यीशु के नाम में,मैं प्रार्थना करता/करती हूं,आमीन। 

1800 425 7755 / 044-33 999 000