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Paul Dhinakaran

धीरज रखना!

Dr. Paul Dhinakaran
14 Jun
मसीह में अतिप्रिय, 

एक दिन, परमेश्वर का एक जन प्रभु से प्रार्थना में संघर्ष कर  रहा था कि वह उसे उसके सारे दुखों व कष्टों का अंत करे। उनको शांति देने के लिए प्रभु यीशु दर्शन में उन्हें स्वर्ग ले गया। वह वहाँ से मसीह यीशु के साथ सब घटनाओं को देख रहा था। 

फिर उन्होंने आत्मा को स्वर्ग से आते देखा। वह एक स्त्री की आत्मा थी। जैसे ही प्रभु ने उसे आते हुए देखा, वह अपने सिंहासन पर से उतरा, उसने गले लगाया और चूमा और कहा, मेरी प्रिय बेटी तूने अपने दैहिक जीवन में कितना दुख उठाया है। पर तूने सब कुछ सहन किया। तूने अच्छी कुश्ती लडी है। आ मेरे पिता के आनन्द में प्रवेश कर। 
परमेश्वर का वह जन जो यह सब होते हुए देख रहा था, चकित रह गया। यीशु ने कहा, मेरे बेटे इस स्त्री ने अपने दैहिक जीवन में केवल दुख ही दुख सहा। उसे उसके पति के द्वारा पीटा एवं सताया गया। परन्तु उसने एक बार भी मुझे श्राप नहीं दिया। इसलिए स्वयं मैंने उसका स्वागत किया।

यदि हम धीरज के साथ सहते हैं तो उसके साथ हम राज्य भी करेंगे। यदि हम प्रभु का इन्कार करेंगे तो वह भी हमारा इन्कार करेगा। इसलिए आप उस अनुग्रह जो मसीह यीशु में है, बलवंत होते जाएँ। जब उसने परीक्षा की दशा में दुख उठाया तो वह उनकी भी सहायता कर सकता है जिनकी परीक्षा होती है। एक दिन आएगा जब आप भी स्वर्ग में ऐसा विश्राम का अनुभव करेंगे। ‘‘यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे।’’ (2 तीमुथियुस 2:12)  
Prayer:
प्रेमी स्वर्गीय पिता, मुझे अनुग्रह दे कि मैं धीरज से अपने कष्टों को झेल सकूँ और उस महिमामय दिन में सम्मान प्राप्त करूँ। मुझे बल दे प्रभु। उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, मुझे बलवंत करें जिससे कि मैं विश्वास में बढता/बढती जाऊँ। मैं यीशु मसीह के नाम में यह मांगता/मांगती हूँ। आमीन् !

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